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शनिवार, 22 जनवरी 2011

नदियों का विकास नदियों की महानता और अरपा विकास बिलासपुर


अनादिकाल से मनुष्य के जीवन में नदियों का महत्व रहा है . विश्व की प्रमुख संस्कृतियाँ नदियों के किनारे विकसित हुई हैं. भारत में सिन्धु घाटी की सभ्यता इसका प्रमाण है .
मानव सभ्यता का उद्भव और संस्कृति का प्रारम्भिक विकास नदी के किनारे ही हुआ. भारत जैसे कृषि प्रधान देश में नदियों का विशेष महत्व है. भारतीय संस्कृति में ये जीवनदायिनी मां की तरह पूजनीय हैं.


एशिया की - ह्वांग-हो  · यांग्त्सी  - मेकांग नदी - ब्रह्मपुत्र  - गंगा   आमूर -  यमुना  - लेना नदी  - महानदी  -  नर्मदा  - कावेरी   सतलज  - सिन्धु   
अफ्रीका की - नील  -  नाइजर  -  कांगो  -  जेम्बेजी  -  लिम्पोपो
उत्तर अमेरिका -मिसिसिपी   हडसन  - डेलावेअर  - मैकेंजी नदी  -  कैंसास 
 दक्षिण अमेरिका - आमेजॉन 
 यूरोप -डुगावा  - टेम्स  - वोल्गा  - सेन  - राइन


अमेज़न के वर्षावन दुनिया में सबसे बड़े हैं. अमेज़न के जंगल धरती के पर्यावरण संतुलन में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं इसलिए उसे 'धरती का फेफड़ा' कहा जाता है.
अमेज़न नदी दुनिया की सबसे लंबी नदी है. दुनिया के समुद्रों में जितना मीठा पानी जाता है उसमें अमेज़न का योगदान 20 
प्रतिशत है.
माँ गंगा को हिन्दू धर्म और संस्कृति में विशेष स्थान प्राप्त है. गंगा की घाटी में ऐसी सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ जिसका प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और वैभवशाली है. जहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त संसार आलोकित हुआ. इसी घाटी में रामायण और महाभारत कालीन युग का उद्भव और विलय हुआ. प्राचीन मगध महाजनपद का उद्भव गंगा घाटी में ही हुआ जहाँ से गणराज्यों की परंपरा विश्व में पहली बार प्रारंभ हुई. यहीं भारत का वह स्वर्ण युग विकसित हुआ जब मौर्य और गुप्त वंशीय राजाओं ने यहाँ शासन किया.


गंगा उत्तरांचल में गंगोत्री से निकलकर उत्तर और पूर्वी भारत के विशाल भू-भाग को सींचती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है. यह देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं, जन जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है. गंगा भारत की पवित्र नदियों में से एक है तथा इसकी उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है.
सिंधु घाटी सभ्यता(३३००-१७०० ई.पू.) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है. इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ. मोहनजोदड़ो, कालीबंगा , लोथल् , धोलावीरा , राखीगरी , और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थेंआज . सिन्धु नदी भारत के हजारों वर्षों के इतिहास का बोध कराती है. यह वही पुण्यसलिला है. जिसकी गोद में हमारी सभ्यता, संस्कृति और समाज ने सांसें लीं, जिसके कारण हम 'हिंदू' और हमारा देश 'हिंदुस्तान' कहलाया, जिसके तट पर वेद रचे गए, ऋषियों ने देवताओं का आवाहन किया और जिसका हर दिन स्मरण करना हिंदू अपना धर्म समझते हैं.सिन्धु का उद्गम स्थान मानसरोवर जलक्षेत्र में कैलाश पर्वत के उत्तर में लगभग पांच हज़ार मीटर की ऊंचाई पर है. यहाँ से मानो शिव चरणों को धोती हुई सिन्धु  दो सौ मील उत्तर-पश्चिम के पठारों और पर्वतों के बीच से गुजरती है.


अमेज़न के किनारों पर नौ देशों के लगभग तीन करोड़ लोग बसते हैं. ये देश हैं-- ब्राज़ील, बोलिविया, पेरू, इक्वेडोर, कोलंबिया, वेनेज़ुएला, गयाना, फ्रेंच गयाना और सूरीनाम. अमेज़न के किनारे रहने वाली दो-तिहाई आबादी ब्राज़ील के लोगों की है.


                                   या आपो दिव्या वा स्नवंति खनित्रिमा उत वा या: स्वयंजा:।
                                                             समुद्रार्था या: शुचय: पावकास्ता आपो देवीरिह मामवंतु।


                                                                                                                              ऋग्वेद, मंडल-7, सूक्त-49


जल की अभ्यर्थना करते हुए कहा गया है कि बादल बूंद, नहर, नदियां, समुद्र सब उसी के प्रसार और विस्तार हैं। दिव्य गुणों से संपन्न जल इस लोक में हमारी रक्षा करे।


नदियां प्रकृति की अमूल्य देन मानी जाती हैं. जनजीवन में तो इसका अहम महत्व है ही, यातायात की रीढ़ भी मानी जाती। देश की कई बड़ी नदियों का उपयोग यातायात के लिए किया जाता है. इसके अलावा सिंचाई, जल की उपलब्धता समेत अन्य कई कारणों से नदियों को अपना विशेष महत्व है. छत्तीसगढ़  में भी नदियों का लगभग जाल सा बिछा है. छोटी-बड़ी नदियों को मिलाकर यहां लगभग 2 से अधिक  दर्जन नदियों का प्रवाह होता है . सबके अपने-अपने महत्व है, अपनी अपनी भूमिकाएं है . इसके बावजूद लोगों के विकास में इनका कोई विशेष महत्व  योगदान नहीं दिया आज देश में नदियों  की  हालत  दयनीय होती जा रही है. हम नदियों में केवल कंक्रीट के जंगल खड़े करते जा रहे है . मुझे लगता  है की  एक अच्छी शुरूवत हुई थी भारत  की नदियों को जोड़ने की जिसे  अब प्रकृति  के साथ छेड छाड न करने  की बात बोल कर ठन्डे बसते में डाल दिया गया. आज कंक्रीट का जंगल हमारी जरुरत बन गया है. आद्योगिक विकास की क्रांति और तकनिकी क्रांति के बाद से हम  प्रकृति  के साथ हम हर मिनट हर दिन कर रह है क्योकि यह छेड छाड मानव विकास की आवश्यकता की पूर्ति के लिए हो रहा है. और यदि हम इन संसाधनों का व्यवस्थित दोहन नहीं करेंगे तो  यह  हम वर्तमान में जीवित नहीं रहा सकते 
हम लोग धन्य है कीबिलासपुर से  40 किलोमीटर दूर शिवनाथ नदी और  बिलासपुर से अन्ता सलिला जीवन दायनी अरपा बिलासपुर के बीचो बिच से गुजरती है . एक समय था जब लोग इसका पानी पिया करते थे आज अरपा की स्थिति काफी गंभीर है 
पिने योग्य पानी अरपा में सोचना किसी सपने से कम नही है एक समय था लोग नदी की रेत में खड़ा कर कर पानी पी लिया करते है ये सब बीते ज़माने की बात हो गई है 


बिलासा गुडी की पहचान अरपा आजादी के ५० सालो बाद तक किसे ने अरपा को सवारने की नहीं सोची या फिर सोची होगी तो केवल कागजो तक ....... शुरुवात विकास अभियान की अरपा की तुलना लन्दन की टेम्स से विदेश दौर का सही उपयोग इस से बेहतर क्या हो सकता है टेम्स को बिलासपुर लाने की कय्वाद  बुलंद इरादे व सहज   व्यक्तित्व के  धनी श्री  अमर अग्रवाल बिलासपुर के विधायक और छत्तीगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन और पुनर्वास मंत्री  ने की और आज """""  अरपा विकास """" श्री अमर अग्रवाल जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है जो की छत्तीसगढ़ का नदियों के विकास में होने वाला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा .  
                                                                                        अरपा के विकास के लिए अरपा विकास प्राधिकरण का गठन हो गया है . 


अरपा विकास योजन के विकास कार्य को करने के लिए राज्य शासन ने प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष कमिश्नर व सचिव कलेक्टर हैं . इसके अलावा निगम आयुक्त सहित अन्य विभागों के अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है . प्राधिकरण गठित होने के बाद दो बार विकास योजना को लेकर बैठक हुई है, जिसमें अलग-अलग उप समितियां बनाए जाने का निर्णय लिया गया.
अरपा को पहले लन्दन की टेम्स नदी जैसा बनाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन अब अरपा को गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी पर रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट  की तरह संवारने का निर्णय लिया गया है.  इसमें १ हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.इस योजना के तहत जमीन के सीमांकन के लिए दस सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसमें नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर टीके वर्मा को बनाया गया है.
 इसके अलावा सदस्यों में पुलिस महानिरीक्षक, कोटा एसडीएम फरिहा सिद्दिकी, बिलासपुर एसडीएम सौम्या चौरसिया, वन संरक्षक, प्रबंध संचालक पर्र्यटन मंडल, मुख्य प्रबंधक उद्योग केंद्र, केंद्रीय भू जल एवं विद्युत अनुसंधान, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारी या प्रतिनिधि, इंजीनियरिंग महाविद्यालय कोनी के विषय विशेषज्ञ, सेंट्रल यूनिवर्सिटी के विषय विशेषज्ञ शामिल हैं

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