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बुधवार, 29 दिसंबर 2010

अरपा विकास प्राधिकरण की दूसरी बैठक

बिलासपुर के अरपा विकास प्राधिकरण की दूसरी बैठक आज संपन हुई , 


अरपा के अमर विकास  से जुडी बिलासपुर के अखबारों में सुर्खियों में रही कुछ खबरे  













जल्द ही अरपा अमर विकास को पंख लगने वाले है 











रविवार, 26 दिसंबर 2010

सीवरेज प्रोजेक्ट बिलासपुर

मेरा मानना है की एक विधायक से अपने शहर के विकास के लिए जितनी उमीदे रहती है , उस से ज्यादा विकास बिलासपुर में देखने को मिला है या कहु हो रहा है और आने वाले समय में अमर विकास की गारंटी है , बिलासपुर की तुलना अगर छत्तीसगढ़  के दुसरे शहरो से करे तो बात आपने आप समझ में आ जाएगी . मध्य प्रदेश के जबलपुर , इन्दोर,ग्वालियर ,भोपाल, को छोड़ कर बाकि पुरे  मध्य प्रदेश के शहरो से तुलना करे तो बिलासपुर में जितना डेवलपमेंट हुआ है उस का आधा भी  मध्य प्रदेश के बाकी के अन्य शहरो में नहीं हुआ होगा. मतलब की अगर बिलासपुर को 80/- मिला तो होशंगाबाद  को 40/- से ज्यादा नहीं . ऐसा मेरा सोचना है .

 बिलासपुर के सीवरेज प्रोजेक्ट पर अभी काम चल रह है पर  कुछ लोग सीवरेज प्रोजेक्ट बिलासपुर  को फेल मानते है और भूल जाते है की जब हम कोई बड़े शहर या महानगरो से हमारे यहाँ कोई मेहमान आता है तो पहली बात यही बोलता है की यहाँ मच्छर  बहुत है ! और गंदगी बहुत है .हमारा बहुत बड़ा घर,हमारा बड़ा सा व्यपार , कार, बिजली कटोती मुक्त राज्य एक छोटे से शब्द के आगे एक दम बोना पड़ जाता है सिर्फ यह एक छोटी सी बात है .हम को आज में जीने की आदत से पड़ गयी है हम आने वाले कल की नहीं सोचते है ! बिलासपुर का सीवरेज प्रोजेक्ट आने वाले समय की सेप्टिक टेंक की गंदगी जो वर्तमान में भी है उस  समस्या को ध्यान में रख  कर बनया जा रहा है ! इस से न केवल  मछर ,गंदगी,  बदबू से छुटकारा मिलेगा बल्कि मलेरिया, फायलेरिया, पीलिया और भी बहुत से बीमारियों से मुक्ति मिलेगी. लन्दन में सन १८०० के आसपास से सीवर लाइन का उपयोग हो रहा है हम लोग कितना पीछे है ! हमारे पास लैपटॉप भी है महगा मोबाईल भी है ब्रांड का जूता भी पहना है पर साथ में सीवर की गंदगी भी लेकर चलते है . भले ही  पीलिया हो गया हो पर यह कुछ लोग  सीवरेज प्रोजेक्ट बिलासपुर की बुराई करना नहीं छोड़ेंगे. लोगो को मानसिकता बदलने की जरुरत है और विज्ञानं और तकनीको पर विस्वास करने की आदत डालनी चाहिए.यही समय की मांग और विकास का सार है
अब सवाल यह उठता है की मैं यह सब बाते क्यों कर रहा हु ...न तो मैं किसी राजनितिक पार्टी से जुड़ा हु और ना ही मेरा कोई अपना सवार्थ है मैं  तकनीकी कार्य से  जुड़ा हुआ हु और मेरे अन्दर का आर्किटेक्टर मुझे मेरे शहर से जुडी कुछ बाते जो कुछ लोग नहीं जानते यह कहने अप लिए प्रेरित करता रहता है
 बिलासपुर का सीवरेज प्रोजेक्ट कोई नया नहीं है  सीवरेज प्रोजेक्ट वर्तमान  में श्री गंगा नगर, उदयपुर, अजमेर, रोपड़,अमृतसर बीकानेर ,गाजियाबाद ,और भी भी बहुत से जगहों मर चल रहा है पर बिलासपुर के जैसे शहरो से तुलना करने पर एक बात नज़र आई है की यहाँ का जो प्रोजेक्ट है वो काफी बड़ा है और तकनिकी रूप से बहुत अच्छा है . ऐसा और भी कई तकनिकी जानकार कहते है
सीवरेज बिलासपुर के विकास के लिए एक प्रमुख जरुरत है हम को इसे तकलीफों भरा एक सरकारी योजना नहीं समझना चाहिए ये हमें हमारे स्वस्थ को तकलीफों से बचने का एक कदम है इसे समझना चाहिए   

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

एक सूफी कथा

यह एक सूफी कथा है. किसी गाँव में एक बहुत सरल स्वभाव का आदमी रहता था. वह लोगों को छोटी-मोटी चीज़ें बेचता था. उस गाँव के सभी निवासी यह समझते थे कि उसमें निर्णय करने, परखने और आंकने की क्षमता नहीं थी. इसीलिए बहुत से लोग उससे चीज़ें खरीदकर उसे खोटे सिक्के दे दिया करते थे. वह उन सिक्कों को ख़ुशी-ख़ुशी ले लेता था. किसी ने उसे कभी भी यह कहते नहीं सुना कि ‘यह सही है और यह गलत है’. कभी-कभी तो उससे सामान लेनेवाले लोग उसे कह देते थे कि उन्होंने दाम चुका दिया है, और वह उनसे पलटकर कभी नहीं कहता था कि ‘नहीं, तुमने पैसे नहीं दिए हैं’. वह सिर्फ इतना ही कहता ‘ठीक है’, और उन्हें धन्यवाद देता.
दूसरे गाँवों से भी लोग आते और बिना कुछ दाम चुकाए उससे सामान ले जाते या उसे खोटे पैसे दे देते. वह किसी से कोई शिकायत नहीं करता.



समय गुज़रते वह आदमी बूढ़ा हो गया और एक दिन उसकी मौत की घड़ी भी आ गयी. कहते हैं कि मरते हुए ये उसके अंतिम शब्द थे: – “मेरे खुदा, मैंने हमेशा ही सब तरह के सिक्के लिए, खोटे सिक्के भी लिए. मैं भी एक खोटा सिक्का ही हूँ, मुझे मत परखना. मैंने तुम्हारे लोगों का फैसला नहीं किया, तुम भी मेरा फैसला मत करना.”
ऐसे आदमी को खुदा कैसे परखता .??

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

अमर विकास

भारतीय लोकतांत्रितक व्यवस्था में विपक्ष के नजरिये से देखने  सब काल्पनिक बाते लगेगी.
एक आर्किटेक्ट के नजरिये से देखो तो लगता है की बिलासपुर में कितना काम हो रहा है और जो प्रोजेक्ट बिलासपुर में चल रहे है वो बड़ते हुए शहर के लिए जरुरी है चाहे वो सीवरेज हो या बाइपास या सुनहरे कल की कदम मिलाता हुआ अरपा विकास प्राधिकरण  अमर विकास का नाम लेता हुआ बिलासपुर आने वाले समय में देश में आपनी अलग पहचान बनने वाला है  रेल्वे जोन ,सीपत  ntpcऔर एशिया के  सबसे बड़े हाई कोर्ट  राज्य बाने के बाद छत्तीसगढ़ के  पहले सीवरेज प्रोजेक्ट चंडीगड़ के बाद दूसरा हाई टेक बस स्टैंड  के बाद छत्तीसगढ़ पहले ट्राफिक पार्क और भी कुछ समय बाद बिलासपुर ऐसा शहर बाने वाला है जिसने आने वाले ३० से ४० सालो के लिए पिने के पानी की व्यवस्था कर ली है  कितना सारा अमर विकास बिलासपुर में चल रह है  थक जाओगे.... जिसकी गिनती नहीं हो सकती ऐसा ही कुछ बिलासपुर में अमर विकास चल रहा है   

विपक्ष  भलीभांति जनता है. तभी तो मौन बैठा है क्योकि अब विकास के विरोध का समय जा चूका है विकास की रह में रोड़ा अटकने वालो को आने वाले समय में समाज कभी माफ़ नहीं करेगा. अब लोगो की सोच में भी विकास की झलक देखने  को मिल रही है बिहार का परिणाम सामने है 

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

मलेरिया

                                                 मलेरिया मानव को 5०,००० वर्षों से प्रभावित 




मलेरिया मानव को 5०,००० वर्षों से प्रभावित कर रहा है शायद यह सदैव से मनुष्य जाति पर परजीवी रहा है। इस परजीवी के निकटवर्ती रिश्तेदार हमारे निकटवर्ती रिश्तेदारों मे यानि चिम्पांज़ी मे रहते हैं। जब से इतिहास लिखा जा रहा है तबसे मलेरिया के वर्णन मिलते हैं। सबसे पुराना वर्णन चीन से २७०० ईसा पूर्व का मिलता है। मलेरिया शब्द की उत्पत्ति मध्यकालीन इटालियन भाषा के शब्दों माला एरिया से हुई है जिनका अर्थ है 'बुरी हवा'। इसे 'दलदली बुखार' (अंग्रेजी: marsh fever, मार्श फ़ीवर) या 'एग' (अंग्रेजी: ague) भी कहा जाता था क्योंकि यह दलदली क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैलता था।

                                                    भारत के 10 प्रतिशत मलेरिया क्षेत्र छत्तीसगढ़ में




विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत के 10 प्रतिशत मलेरिया क्षेत्र छत्तीसगढ़ में आते है और पी.फाल्सीपेरम के संक्रमण के देश में मलेरिया क्षेत्र के 18 प्रतिशत मामले नोटिस किये गये है। मलेरिया नैदानिक रोग है उचित समय पर सर्तकता एवं उपचार से बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। 

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित इस रिपोर्ट
देश में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप के बारे में एक नई रिपोर्ट आई है। मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मलेरिया से हर साल दो लाख लोग मरते हैं। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन (15 हजार मौतें) से 13 गुना और खुद हमारे नैशनल मलेरिया कंट्रोल प्रोग्राम के अनुमान (औसतन एक हजार मौतें) से 200 गुना ज्यादा है। इस हिसाब से मलेरिया हमारे लिए किसी महामारी से कम नहीं है। लैंसेट के शोधकर्ताओं ने आंकड़ों में इतने बड़े फर्क की वजह इस बीमारी से घरों में हो जाने वाली मौतों को न गिना जाना बताया है।


मलेरिया के मुख्य लक्षण


मलेरिया के लक्षण फ्लू और अन्य ज्वरों से मिलते जुलते रहते हैं । फिर भी तुरन्त निदान कर चिकित्सा की अपेक्षा आवश्यक होती है । इसके प्रमुख लक्षण ये हैं -
* ठंड और कंपन के साथ मध्यम तेज बुखार, जो 2 -4 दिन एकान्तर में आता है । खूब पसीना आना, मलेरिया का सूचक है ।
* तेज सिरदर्द और पेट का दर्द भी सामान्यतया होता है ।
* भूख न लगना और वमन भी हो सकते हैं ।
* लीवर की असामान्यता के कारण रक्त शर्करा कम हो सकती है, जिससे हाइपोग्लाइसिमिया के लक्षण प्रकट होते हैं ।
* चिकित्सा न करने पर तीव्र मलेरिया गहरे भूरे रंग का मूत्र आता है । इसे रीनल फेलयर होकर मूत्र में रक्त उत्सर्जन होने लगता है । इसे हिमोग्लोबिनूरिया कहते हैं ।
* जिनमें झटका, मूर्च्छा या बेहोशी या असामान्य व्यवहार हो उनमें सेरिब्रल मलेरिया का संदेह किया जाता है । 




                                                              मलेरिया कैसे फैलता है 


मलेरिया जीवन चक्र के दो प्रवाह होते है, जिससे यह रोग बहुत तेजी से फैलता हैः-
I प्रवाह
सक्रमित मच्‍छर से स्‍वस्‍थ मनुष्‍य को
जब सक्रमित मादा एनोलीज मच्‍छर किसी स्‍व‍स्‍थ्‍य व्‍यक्ति को काटता है तो वह अपने लार के साथ उसके रक्‍त मे मलेरिया परजीवियो को पहूंचा देता है। सक्रमित मच्‍छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद उस व्‍यक्ति मे मलेरिया रोग के लक्षण प्रकट हो जाते है।
II प्रवाह
मलेरिया रोगी से असक्रमित मादा एनोफेलिज मच्‍छर मे होकर अन्‍य स्‍वस्‍थ व्‍यक्तियो को
मलेरिया के रोगी को काटने पर असंक्रमित मादा एनोलीज मच्‍छर रोगी के खून के साथ मलेरिया परजीवी को भी चूंस लेते हैं व 12-14 दिनो मे ये मादा एनोलीज मच्‍छर भी संक्रमित होकर मलेरिया फेलाने मे सक्षम होते है तथा जितने भी स्‍वस्‍थय मनुष्‍यो को काटते है। उन्‍हे मलेरिया हो जाता है। इस तरह एक मलेरिया रोगी से यह रोग कई स्‍वस्‍थ्‍य मनुष्‍य में फैलता है।

यह तो सच है की हमारी सतर्कता ही मलेरिया से बचाव का रास्ता है ईस बीमारी को हम लोग जितनी आसानी से नजर अंदाज कर रहे है वो उतनी ही सरलता से हमारे घरो में पहुच रही है.
हमारा भी यह दायित्व बनता है की हम भी मलेरिया के उन्मूलन के लिए शासन की रणनीतियो का हिसा बने !
विशेष 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना

स्वास्थ्य बीमा योजना

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना : छत्तीसगढ़ में बीस हजार से ज्यादा मरीजों को मिली 9.13 करोड़ की सहायता


कार्ड और इलाज में दिक्कत होने पर तत्काल शिकायत करने की अपील

डायल करें : 0771-2236341 और 4255948 

राज्य संजीवनी कोष से दाहिने दिल का ऑपरेशन हुआ कामयाब

एक आम इन्सान का कलेजा छाती के बायीं ओर होता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के रायपुर के राजेन्द्र नगर में रहने वाले ५५ वर्षीय कृष्णा खंदार का दिल छाती के दाहिनीं ओर था! और उन्हें इस बात की जानकारी भी नहीं थी .५५ वर्ष की उम्र जब उन्हें जब हार्टअटैक आया तो पता चला की उनका दिल छाती के दाहिनीं ओर था! श्री कृष्णा को नवम्बर के पहले सप्ताह में हार्टअटैक आने पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर होने पर नजदीक के एस्कार्ट हार्ट सेंटर रिफर कर दिया गया। डॉक्टर भी श्री कृष्णा का दिल दाहिनीं ओर होने पर अचंभित थे! एस्कार्ट हार्ट सेंटर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सतीश सूर्यवंशी ने दिल्ली के अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लेकर 9 नवम्बर को  कृष्णा खंदार के हृदय का सफलतापूर्वक आपरेशन कर दिया। आपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। इस आपरेशन का पूरा खर्च राज्य शासन द्वारा संजीवनी कोष से दिया गया है!

डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि  कृष्णा खंदार का केवल हृदय ही नहीं बल्कि उनका लीवर भी उल्टे स्थान पर है। सामान्यत: व्यक्ति का लीवर दाहिनीं ओर होता है, लेकिन उनका लीवर बायीं ओर है! उन्होंने बताया कि साठ हजार व्यक्तियों में से किसी एक का हृदय अपने स्थान से दूसरी ओर होता है। छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में यह पहला प्रकरण है, जिनका दिल दाहिनीं ओर हो और हार्टअटैक आने के बाद उनका सफलतापूर्वक आपरेशन किया गया हो। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे 'डेक्सट्रोकाडिया विथ साइट्स इनवर्सेस' कहा जाता है। ऐसे मरीज को हृदयाघात होने पर आपरेशन में काफी दिक्कतें होती है! डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि मरीज श्री कृष्णा को गंभीर हालत में एस्कार्ट में लाया गया था। परीक्षण में पाया गया कि मरीज का दिल दाहिनी ओर है और हृदय की मुख्य नली में ब्लॉकेज था। मरीज के दिल की धड़कन बहुत धीमी थी, जिसे सामान्य करने के लिए तुरंत तार डालकर धड़कन सामान्य किया गया! इसके बाद उनकी तुरंत एंज्योप्लास्टी की गई! दिल की धड़कन को सामान्य बनाये रखने के लिए उनके हृदय में पेसमेकर भी लगाया गया है!

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की संजीवनी कोष योजना के तहत कृष्णा खंदार को नया जीवन मिला ! इस पूरे आपरेशन के लिए मरीज से कोई पैसा नहीं लिया गया है! मरीज गरीबी रेखा श्रेणी के होने के कारण पूरा खर्च राज्य शासन उठा रहा है!

सिकल सेल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन छत्तीसगढ़



सिकल सेल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन छत्तीसगढ़ से जुडी कुछ महत्वपूर्ण खबरे 

सिकल सेल पर राजधानी रायपुर में 22 नवम्बर से आयोजित चौंथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन बुधवार को देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने सिकल सेल रोग के क्लिनिकल पक्ष, प्रयोग शाला तकनीक और सिकल सेल के निदान के लिए आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में सिकल सेल में आयुर्वेदिक दवाईयों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इटली के प्रोफेसर रार्बटो गंबारी ने आयुर्वेदिक औषधियों पर अपने विचार रखे और प्राकृतिक औषधी एनजीसिलिन और रेस वैराटालिक पर अब तक हुए अनुसंधान के निष्कर्ष बताए। उन्होंने बताया कि ये दोनों प्राकृतिक पदार्थ हिमोग्लोबीन एफ पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। प्राकृतिक पदार्थ सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं और इनका उपयोग आसानी से किया जा सकता है। न्यूजर्सी अमेरिका से आए प्रोफेसर डॉ. आर.सी.पाण्डेय ने सिकलसेल में आयुर्वेदिक औषधियों के विकास में आधुनिक विज्ञान की भूमिका पर अपने अनुभव रखे। उन्होंने न्यूब्रानिक आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में हुए अनुसंधान के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों में साइड इफेक्ट नहीं होते, लेकिन आयुर्वेद औषधियों के उत्पादन एवं सभी प्रक्रियाओं का मानकीकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नाइजीरिया में सिकलसेल का इलाज कई परम्परागत स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा किया जा रहा है। नाइजीरिया में पाए जाने वाले पौधे निप्रोसिन पर अनुसंधान किए गए हैं और सिकलसेल रोगियों पर किए गए प्रयोग के बाद यह पाया गया है कि निप्रोसिन सिकलसेल रोगी में आक्सीजन अवशोषन करने वाले हिमोग्लोबिन को सक्रिय करता है।
माली के प्रोफेसर दापा डीएलो ने अपने अध्ययन में प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर बताया कि सिकलसेल रोगी में मलेरिया के विरूध्द लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।सम्मेलन के तकनीकी सत्र में आठ विषय विशेषज्ञों ने अपना शोध पत्र पड़ा 
विशेषज्ञों ने सिकलसेल पर किए विभिन्न अनुसंधानों और अध्ययनों के निष्कर्षों से भी अवगत कराया। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन 26 नवम्बर को जेल रोड स्थित होटल बेबीलोन-इन में साढ़े चार बजे होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। नई दिल्ली के डॉ. वी.एस. चौहान कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। जैमेका के प्रोफेसर जी.आर. सर्जेंट इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समापन के दूसरे दिन 27 नवम्बर को देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को सिकलसेल पर आयोजित शिविरों का अवलोकन कराया जाएगा।

एक सवाल


एक सवाल क्या गाँव  में किसान रहते है



हां रहते है

तो वो कौन लोग है

वे सिफ्र गोँव के संपन लोग है

और बाकि ग्रमीण लोग कौन है

क्या देश की सरकार कहती है की वो किसान नहीं वो मजदुर है

भला ऐसा कैसे ..??


.......NREGA........

अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकर

अरपा विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के गठन होना मैंने कई बार इस अरपा प्रोजेक्ट पर कई लोगो से चर्चा की है और यह मेरे लिए भी एक सपने को सच होते देखने जैसा है इस प्रोजेक्ट को को लेकर जो जो बाते मैंने सोची थी वो भी समय के साथ हकीकत में बदलती नज़र आ रही है .. यह प्रोजेक्ट चलू होने से मुझे यह फायदा मिला है की मैंने जिन जिन लोगो के सामने इस प्रोजेक्ट से जुडी बाते कही थी वो सच होते जा रही है

Ek Pahal ek Shuruwat

  




बिलसपुर में हम ने सडक सुरक्षा की पहल की हम ने एक ऐसी शुरुवात की है जो पता

नहीं कहा तक जाएगी


शुरुवात में तो मुझे लगा की मैं कुछ ऐसा सोच रहा हु जिस का कोई सडक सुरक्षा से लेना देना नहीं है. क्या कभी रेडियम बेंड से पदयात्रियो की सुरक्षाहो सकती है मैं जैसे ही इस विचार को लेकर आपने मित्र भरत लोनिया जी के पास गया तो उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार किया हो कहा की यह ऐसे सोच है जो कोई नहीं सोच सकता . और उन्होंने तुरंत ही इस कार्य को करने की आपनी स्वीकृति दे दी और हमने जो किया वो आप के सामने है .
  



                                            
                                             महिला पदयात्रियो को रिंकू मिश्रा जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए

                                              भरत लोनिया जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए , रिंकू मिश्रा जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए

                    बिलासा नगर विकास समिति के अध्यक्ष श्री भरत लोनिया जी बच्चो को रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए


छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष माननीय श्री धरमलाल कौशिक जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर पद-यात्रा करते रतनपुर                                        महामाया देवी के दर्शन को जाते हुए
रिंकू मिश्रा जी बिलासा नगर विकास समिति के संरक्षक रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए साथ में श्री अर्जुन सिसोदिया जी भरत लोनिया जी व अन्य  साथी गण
         छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष माननीय श्री धरमलाल कौशिक जी को रिंकू मिश्रा जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष माननीय श्री धरमलाल कौशिक जी को रिंकू 

मिश्रा जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट बंधते हुए




माननीय श्री भुपेन्द्र सवन्नी जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर पद-यात्रा करते रतनपुर महामाया देवी के दर्शन को जाते हुए















                                           श्री बंटी शर्मा जी श्री अनिरुद्ध शर्मा जी व  विशाल पाण्डेय 

            21 सदी के बालक और किशोर रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर रतनपुर महामाया देवी के दर्शन को जाते हुए



                                                         जयकारो के बिच रेडियम की चमक

                         कम रौशनी में पदयात्री रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर महामाया देवी के दर्शन को जाते हुए

                                                श्री जयेश तिवारी जी ट्रांसपोर्टर श्री निशांत तिवारी जी 

विशाल पांडे व श्री दिनेश ध्रुव जी ( पार्षद व MIC मेम्बर नगर निगम बिलासपुर ) रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर रेडियम की उपयोगिता को बढावा देते हुए साथ में श्री जयेश तिवारी जी

 श्री दिनेश ध्रुव जी ( पार्षद व MIC मेम्बर नगर निगम बिलासपुर ) रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर रेडियम की उपयोगिता को                                   बढावा देते हुए साथ में श्री जयेश तिवारी जी
                                    मनीष  जायसवाल जी ,मेरे बड़े भाई श्री राम द्विवेदी जी ,  मनीष रामटेके जी 
                                 श्री पियूष जायसवाल जी,श्री गोपाल कानाबर जी, व श्री गुप्ता जी
                                                        रतनपुर महाहाया मंदिर प्रवेश द्वार 


                                                        पद यात्रा कर पहुचे पदयात्री 
                                                              श्री नीतिन अग्रवाल जी 


                            हाई कोर्ट के अधिवक्ता श्री ब्रिजेश गुप्ता जी व श्री दिनेश साहू जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट... बांधे हुए

 महामाया मंदिर परिसर रतनपुर में जितेन्द्र षडंगी जी व नितिन अग्रवाल जी रेडियम बेल्ट बांधे हुए
द यात्रा कर के पहुचे पदयात्री महामाया देवी के मंदिर में तथा उन के हाथो में रेडियम सुरक्षा बेल्ट दिखता हुआ






                                    युवा पुलिस अधिकारी श्री वासनिक जी रेडियम की उपयोगिता को बढावा देते हुए

                               व्यवसायी श्री सिदरा जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर रेडियम के महत्व को समझा


               व्यवसायी श्री सिदरा जी रेडियम सुरक्षा बेल्ट पहन कर रेडियम के महत्व को समझ कर इस का प्रचार कर रहे है 


दोस्तों का शुक्रिया जिन्हों ने हमें इस  कार्य के लिए  अपना कीमती समय सहयोग दिया 

.............भरत लोनिया...... 
                         अध्यक्ष
             बिलासा नगर विकास समिति