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गुरुवार, 25 नवंबर 2010

सिकल सेल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन छत्तीसगढ़



सिकल सेल अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन छत्तीसगढ़ से जुडी कुछ महत्वपूर्ण खबरे 

सिकल सेल पर राजधानी रायपुर में 22 नवम्बर से आयोजित चौंथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन बुधवार को देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने सिकल सेल रोग के क्लिनिकल पक्ष, प्रयोग शाला तकनीक और सिकल सेल के निदान के लिए आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में सिकल सेल में आयुर्वेदिक दवाईयों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। इटली के प्रोफेसर रार्बटो गंबारी ने आयुर्वेदिक औषधियों पर अपने विचार रखे और प्राकृतिक औषधी एनजीसिलिन और रेस वैराटालिक पर अब तक हुए अनुसंधान के निष्कर्ष बताए। उन्होंने बताया कि ये दोनों प्राकृतिक पदार्थ हिमोग्लोबीन एफ पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। प्राकृतिक पदार्थ सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं और इनका उपयोग आसानी से किया जा सकता है। न्यूजर्सी अमेरिका से आए प्रोफेसर डॉ. आर.सी.पाण्डेय ने सिकलसेल में आयुर्वेदिक औषधियों के विकास में आधुनिक विज्ञान की भूमिका पर अपने अनुभव रखे। उन्होंने न्यूब्रानिक आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में हुए अनुसंधान के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों में साइड इफेक्ट नहीं होते, लेकिन आयुर्वेद औषधियों के उत्पादन एवं सभी प्रक्रियाओं का मानकीकरण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नाइजीरिया में सिकलसेल का इलाज कई परम्परागत स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा किया जा रहा है। नाइजीरिया में पाए जाने वाले पौधे निप्रोसिन पर अनुसंधान किए गए हैं और सिकलसेल रोगियों पर किए गए प्रयोग के बाद यह पाया गया है कि निप्रोसिन सिकलसेल रोगी में आक्सीजन अवशोषन करने वाले हिमोग्लोबिन को सक्रिय करता है।
माली के प्रोफेसर दापा डीएलो ने अपने अध्ययन में प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर बताया कि सिकलसेल रोगी में मलेरिया के विरूध्द लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है।सम्मेलन के तकनीकी सत्र में आठ विषय विशेषज्ञों ने अपना शोध पत्र पड़ा 
विशेषज्ञों ने सिकलसेल पर किए विभिन्न अनुसंधानों और अध्ययनों के निष्कर्षों से भी अवगत कराया। इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन 26 नवम्बर को जेल रोड स्थित होटल बेबीलोन-इन में साढ़े चार बजे होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री अमर अग्रवाल समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। नई दिल्ली के डॉ. वी.एस. चौहान कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। जैमेका के प्रोफेसर जी.आर. सर्जेंट इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समापन के दूसरे दिन 27 नवम्बर को देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को सिकलसेल पर आयोजित शिविरों का अवलोकन कराया जाएगा।

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