मलेरिया मानव को 5०,००० वर्षों से प्रभावित कर रहा है शायद यह सदैव से मनुष्य जाति पर परजीवी रहा है। इस परजीवी के निकटवर्ती रिश्तेदार हमारे निकटवर्ती रिश्तेदारों मे यानि चिम्पांज़ी मे रहते हैं। जब से इतिहास लिखा जा रहा है तबसे मलेरिया के वर्णन मिलते हैं। सबसे पुराना वर्णन चीन से २७०० ईसा पूर्व का मिलता है। मलेरिया शब्द की उत्पत्ति मध्यकालीन इटालियन भाषा के शब्दों माला एरिया से हुई है जिनका अर्थ है 'बुरी हवा'। इसे 'दलदली बुखार' (अंग्रेजी: marsh fever, मार्श फ़ीवर) या 'एग' (अंग्रेजी: ague) भी कहा जाता था क्योंकि यह दलदली क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैलता था।
भारत के 10 प्रतिशत मलेरिया क्षेत्र छत्तीसगढ़ में
विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत के 10 प्रतिशत मलेरिया क्षेत्र छत्तीसगढ़ में आते है और पी.फाल्सीपेरम के संक्रमण के देश में मलेरिया क्षेत्र के 18 प्रतिशत मामले नोटिस किये गये है। मलेरिया नैदानिक रोग है उचित समय पर सर्तकता एवं उपचार से बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित इस रिपोर्ट
देश में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप के बारे में एक नई रिपोर्ट आई है। मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मलेरिया से हर साल दो लाख लोग मरते हैं। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन (15 हजार मौतें) से 13 गुना और खुद हमारे नैशनल मलेरिया कंट्रोल प्रोग्राम के अनुमान (औसतन एक हजार मौतें) से 200 गुना ज्यादा है। इस हिसाब से मलेरिया हमारे लिए किसी महामारी से कम नहीं है। लैंसेट के शोधकर्ताओं ने आंकड़ों में इतने बड़े फर्क की वजह इस बीमारी से घरों में हो जाने वाली मौतों को न गिना जाना बताया है।
मलेरिया के मुख्य लक्षण
मलेरिया के लक्षण फ्लू और अन्य ज्वरों से मिलते जुलते रहते हैं । फिर भी तुरन्त निदान कर चिकित्सा की अपेक्षा आवश्यक होती है । इसके प्रमुख लक्षण ये हैं -
* ठंड और कंपन के साथ मध्यम तेज बुखार, जो 2 -4 दिन एकान्तर में आता है । खूब पसीना आना, मलेरिया का सूचक है ।
* तेज सिरदर्द और पेट का दर्द भी सामान्यतया होता है ।
* भूख न लगना और वमन भी हो सकते हैं ।
* लीवर की असामान्यता के कारण रक्त शर्करा कम हो सकती है, जिससे हाइपोग्लाइसिमिया के लक्षण प्रकट होते हैं ।
* चिकित्सा न करने पर तीव्र मलेरिया गहरे भूरे रंग का मूत्र आता है । इसे रीनल फेलयर होकर मूत्र में रक्त उत्सर्जन होने लगता है । इसे हिमोग्लोबिनूरिया कहते हैं ।
* जिनमें झटका, मूर्च्छा या बेहोशी या असामान्य व्यवहार हो उनमें सेरिब्रल मलेरिया का संदेह किया जाता है ।
मलेरिया कैसे फैलता है
मलेरिया जीवन चक्र के दो प्रवाह होते है, जिससे यह रोग बहुत तेजी से फैलता हैः-
I प्रवाह
सक्रमित मच्छर से स्वस्थ मनुष्य को
जब सक्रमित मादा एनोलीज मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो वह अपने लार के साथ उसके रक्त मे मलेरिया परजीवियो को पहूंचा देता है। सक्रमित मच्छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद उस व्यक्ति मे मलेरिया रोग के लक्षण प्रकट हो जाते है।
II प्रवाह
मलेरिया रोगी से असक्रमित मादा एनोफेलिज मच्छर मे होकर अन्य स्वस्थ व्यक्तियो को
मलेरिया के रोगी को काटने पर असंक्रमित मादा एनोलीज मच्छर रोगी के खून के साथ मलेरिया परजीवी को भी चूंस लेते हैं व 12-14 दिनो मे ये मादा एनोलीज मच्छर भी संक्रमित होकर मलेरिया फेलाने मे सक्षम होते है तथा जितने भी स्वस्थय मनुष्यो को काटते है। उन्हे मलेरिया हो जाता है। इस तरह एक मलेरिया रोगी से यह रोग कई स्वस्थ्य मनुष्य में फैलता है।
I प्रवाह
सक्रमित मच्छर से स्वस्थ मनुष्य को
जब सक्रमित मादा एनोलीज मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो वह अपने लार के साथ उसके रक्त मे मलेरिया परजीवियो को पहूंचा देता है। सक्रमित मच्छर के काटने के 10-12 दिनो के बाद उस व्यक्ति मे मलेरिया रोग के लक्षण प्रकट हो जाते है।
II प्रवाह
मलेरिया रोगी से असक्रमित मादा एनोफेलिज मच्छर मे होकर अन्य स्वस्थ व्यक्तियो को
मलेरिया के रोगी को काटने पर असंक्रमित मादा एनोलीज मच्छर रोगी के खून के साथ मलेरिया परजीवी को भी चूंस लेते हैं व 12-14 दिनो मे ये मादा एनोलीज मच्छर भी संक्रमित होकर मलेरिया फेलाने मे सक्षम होते है तथा जितने भी स्वस्थय मनुष्यो को काटते है। उन्हे मलेरिया हो जाता है। इस तरह एक मलेरिया रोगी से यह रोग कई स्वस्थ्य मनुष्य में फैलता है।
यह तो सच है की हमारी सतर्कता ही मलेरिया से बचाव का रास्ता है ईस बीमारी को हम लोग जितनी आसानी से नजर अंदाज कर रहे है वो उतनी ही सरलता से हमारे घरो में पहुच रही है.
हमारा भी यह दायित्व बनता है की हम भी मलेरिया के उन्मूलन के लिए शासन की रणनीतियो का हिसा बने !
हमारा भी यह दायित्व बनता है की हम भी मलेरिया के उन्मूलन के लिए शासन की रणनीतियो का हिसा बने !
विशेष



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें