इस विभाग का राजस्व निरतंर बढ़ा है। राजस्व बढ़ाने के लिए कैसी रणनीति अपनाई
राज्य निर्माण के समय कर की दर ज्यादा होने के बावजूद सरकार के खजाने में केवल छह सौ करोड़ आते थे। हमने बिना कर की दर बढ़ाए
कर प्रक्रिया का सरलीकरण और युक्तियुक्तकरण किया। हमने उन स्रोतों को भी बंद किया जहां, कर अपंवचन की गुजांईश होती थी। इन
सबके फलस्वरूप कर में निरतंर इजाफा हुआ। आज वाणिज्यिक कर, आबकारी और पंजीयन को मिलाकर यह विभाग राज्य सरकार को
साढ़े छह हजार करोड़ रूपए से ज्यादा का राजस्व दे रहा है
श्री मुकेश अग्रवाल जी के ब्लॉग से
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